Hindi Kavita
हिंदी कविता
"वादा"
सुनो दिकु...
तुम से मिली मोहब्बत को कभी झुकने नहीं दूंगा
वादा करता हूँ
इंतज़ार करूँगा,
पर अपने हौंसले को कभी टूटने नहीं दूंगा
अरदास की है रब से
ईश्वर से हाथ जोड़े है
तुम तक अपनी बात पहुँचाने के लिए
मैंने कठिनाइयों के हर दरवाज़े तोड़े है
इतनी आसानी से अपनी किस्मत को में रूठने नहीं दूंगा
वादा करता हूँ
इंतज़ार करूँगा,
पर अपने हौंसले को कभी टूटने नहीं दूंगा
जब वक्त के साथ चेहरे पर झुर्रियाँ पड़ जाएगी
यह आँखें ज़्यादा कुछ देख नहीं पाएगी
उस वक्त भी तुम्हारी यादों की महक को में सूखने नहीं दूंगा
वादा करता हूँ
इंतज़ार करूँगा,
पर अपने हौंसले को कभी टूटने नहीं दूंगा
*प्रेम का इंतज़ार अपनी दिकु के लिए*
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