मुख्यपृष्ठ kunwar-narayan कुँवर नारायण की कविता संग्रह: चतुर्थ खंड : चक्रव्यूह - वरासत कुँवर नारायण की कविता संग्रह: चतुर्थ खंड : चक्रव्यूह - वरासत Hindi Kavita Hindi Kavitaहिंदी कविता Chakravyuh : Kunwar Narayan कुँवर नारायण की कविता संग्रह: चक्रव्यूह - वरासतचतुर्थ खंड : चक्रव्यूहवरासतकौन कब तक बन सकेगा कवच मेरा?युद्ध मेरा, मुझे लड़नाइस महाजीवन समर में अन्त तक कटि-बद्ध :मेरे ही लिए वह व्यूह घेरा,मुझे हर आघात सहना,गर्भ-निश्चित मैं नया अभिमन्यु पैतृक-युद्ध! Tags kavitakunwar-narayan Facebook Twitter Whatsapp और नया पुराने