Hindi Kavita
हिंदी कविता
वो बे-हिसी के दिन आये कि कुछ हुआ न लगा - वसीम बरेलवी
Wo Behisi Ke Din Aaye Ki Kuch Hua Na Laga – Waseem Barelvi
वो बे-हिसी के दिन आये कि कुछ हुआ न लगा
कब उसको भूल गये ये भी तो पता न लगा
बिछड़ते वक़्त दिलासे, न खोखले वादे
वह पहली बार मुझे आज बेवफ़ा न लगा
जहां पे दस्तकें पहचान के जवाब मिले
यह देखने का सलीक़ा भी किसको आता है
कि उसने देखा मुझे और देखता न लगा
'वसीम' अपने गरेबाँ में झांककर देखा
तो अपने चारों तरफ कोई भी बुरा न लगा।
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