Hindi Kavita
हिंदी कविता
रात के हाथ से दिन निकलने लगे - वसीम बरेलवी
Raat ke Haath Se Din Nikalane Lage - Waseem Barelvi
रात के हाथ से दिन निकलने लगे
जायदादो के मािलक बदलने लगे
एक अफ़वाह सब रौनक़े ले गयी
देखते-देखते शह्र जलने लगे
म तो खोया रहूंगा तेरे प्यार मे
सोचने से कोई राह मिलती नही
चल दिए है तो रस्ते निकलने लगे
छीन ली शोहरतों ने सब आज़ािदयां
राह चलतो सेरिश्ते िनकलने लगे
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