अपने साए को इतना समझाने दे - वसीम बरेलवी Apne Saaye Ko Itna Samjhane De – Waseem Barelvi

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अपने साए को इतना समझाने दे - वसीम बरेलवी
Apne Saaye Ko Itna Samjhane De – Waseem Barelvi


अपने साए को इतना समझाने दे
मुझ तक मेरे हिस्से की धूप आने दे

एक नज़र में कई ज़माने देखे तो
बूढ़ी आँखों की तस्वीर बनाने दे

बाबा दुनिया जीत के मैं दिखला दूँगा
अपनी नज़र से दूर तो मुझ को जाने दे
Wasim-Barelvi

मैं भी तो इस बाग़ का एक परिंदा हूँ
मेरी ही आवाज़ में मुझ को गाने दे

फिर तो ये ऊँचा ही होता जाएगा
बचपन के हाथों में चाँद आ जाने दे

फ़सलें पक जाएँ तो खेत से बिछ्ड़ेंगी
रोती आँख को प्यार कहाँ समझाने दे।

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